बिना बायोप्सी मिलेगा कैंसर का टार्गेटेड इलाज




उच्च जोखिम वाले मरीज को बिना बायोप्सी मिलेगा कैंसर का टार्गेटेड इलाज—BIMR Hospitals की नई पहल

फेफड़ों के कैंसर के इलाज में हाल के वर्षों में काफी प्रगति हुई है। अब केवल कीमोथेरेपी ही नहीं, बल्कि “टार्गेटेड थेरेपी” और इम्यूनोथेरेपी जैसे आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं, जो रोगी की आयु और जीवन गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं।

इन उपचारों के लिए कैंसर के ऊतक (बायोप्सी) की जांच कर विशेष मार्कर जैसे EGFR आदि (जैसे ALK, ROS, PD-L1) की पहचान करना आवश्यक होता है। हालांकि, उच्च जोखिम वाले रोगियों में बायोप्सी कराना हमेशा सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि इसमें फेफड़े में छेद (प्न्यूमोथोरैक्स) या सांस की तकलीफ जैसी जटिलताओं का खतरा रहता है। ऐसे मामलों में, फेफड़ों के आसपास जमा पानी (प्लूरल फ्लूइड) से “सेल ब्लॉक” बनाकर जांच करना एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हो सकता है। इससे बिना किसी बड़े इनवेसिव प्रोसीजर के ही कैंसर की पुष्टि और आवश्यक जीन परीक्षण संभव हो सकता है।

हाल ही में BIMR अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव जैन द्वारा एक बुजुर्ग मरीज में, जिनमें बायोप्सी का जोखिम अधिक था, यह निर्णय लिया गया कि कम जोखिम वाले विकल्प का उपयोग किया जाए। इसके लिए पैथोलॉजी विभाग (डॉ. गरिमा गुप्ता, डॉ. ऋतुजा, डॉ. मितुल गांगुली ) के साथ समन्वय कर प्लूरल फ्लूइड से सेल ब्लॉक तैयार किया गया।

इस जांच से IHC एवं आधुनिक तकनीकों (NGS) द्वारा लंग एडेनोकार्सिनोमा की पुष्टि हुई, साथ ही EGFR और PD-L1 जैसे महत्वपूर्ण मार्कर भी पहचाने गए, जिससे बिना बायोप्सी के ही लक्षित (टार्गेटेड) इलाज की योजना बनाई जा सकी। यह तरीका विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी है, जिनमें बायोप्सी का जोखिम अधिक होता है।