ग्वालियर में पहली बार ईबीयूएस से फेफड़ों की बीमारियों की सफल जांच
डॉ. गौरव जैन, कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, बीआईएमआर हॉस्पिटल ग्वालियर द्वारा पहली बार ग्वालियर में अत्याधुनिक एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस-टीवीएनए) तकनीक के माध्यम से सफल जांच की गई। यह ग्वालियर के चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इस तकनीक से बिना किसी बड़ी सर्जरी के फेफड़ों एवं मेडियास्टाइनम (छाती के मध्य भाग) की कई जटिल बीमारियों का सटीक निदान किया जा सकता है।
इस उद्देश्य से ईबीयूएस मशीन को सीमित अवधि के लिए ग्वालियर में उपलब्ध कराया गया, ताकि यह आकलन किया जा सके कि इस अत्याधुनिक जांच की स्थानीय स्तर पर कितनी आवश्यकता है। इसका उद्देश्य यह भी था कि मरीजों को केवल जांच के लिए दिल्ली, मुंबई, जयपुर जैसे बड़े शहरों की यात्रा न करनी पड़े।
पहले मरीज में वर्ष 2025 से फेफड़े में कैविटी थी। मरीज की पहले एक अन्य केंद्र पर ब्रोंकोस्कोपी भी की जा चुकी थी, लेकिन बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था। इसके बाद ईबीयूएस की सहायता से सैंपल लिए गए, जिनकी प्रारंभिक रिपोर्ट नॉन-ट्यूबरकुलस माइकोबैक्टीरियल (एनटीएम) संक्रमण की ओर संकेत करती है। अंतिम माइक्रोबायोलॉजिकल रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।
दूसरे मामले में एक युवती के मेडियास्टाइनम के लिम्फ नोड्स में सूजन थी, जबकि फेफड़े सामान्य थे। ईबीयूएस द्वारा लिम्फ नोड से सैंपल लेकर जांच की गई, जिसमें ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) की पुष्टि हुई। दवा प्रतिरोध संबंधी जांच जारी है।
तीसरे मामले में एक छोटी बच्ची, जिसे इस जांच के लिए कोटा से जयपुर रेफर किया गया था, उसका ईबीयूएस ग्वालियर में ही किया गया। मेडियास्टाइनल लिम्फ नोड की जांच में टीबी की पुष्टि हुई। दवा प्रतिरोध संबंधी रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।
डॉ. गौरव जैन ने बताया कि ईबीयूएस-टीबीएनए एक अत्याधुनिक एवं न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें अल्ट्रासाउंड की सहायता से श्वासनली के रास्ते मेडियास्टाइनम के लिम्फ नोड्स एवं अन्य गांठों से सटीक सैंपल लिए जाते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से टीबी, फेफड़ों के कैंसर, सारकॉइडोसिस, लिम्फोमा तथा अन्य जटिल छाती संबंधी रोगों के निदान में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस तकनीक के माध्यम से कई मरीजों का बिना बड़ी सर्जरी के सटीक निदान संभव हो सकता है।